जो खुद भ्रष्ट थे वो चले गए I

हा.जो सोना होता हे वह हमेशा चमकता हे पीतल के उपर कितना भी सोना ढोला जय इससे वः सोना नहीं बन जाता. में बात कर रहा हु मनहुश[मनीष]तिवारी की जो बोले थे की ”अन्ना तुम किस मुह से भ्रस्ताचार की बात कर ते हो .जब तुम खुद भ्रस्ताचार में लिप्त हो” कहा गए वो लोग?और अन्ना आजभी वाही हे जिन्होंने जवाब करारा दिया था.”मेरा १०० रूपये का भ्रस्ताचार दिखाओ में सिब्बल के घर पानी भरूँगा”.सत्य अभीभी चमक रहा हे और जुट हवा हो गया हुवा सबने देखा हे.

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